कि तमन्ना नहीं कि अब तुम्हें अपना बनाए !
ये चाँद गवाह है, कि रातें गुज़री तेरे इंतज़ार में ,
ये आँखें गवाह हैं, कि हर शख्स में ढूँढ़ा है तुझे ,
ये बाँहे गवाह हैं, कि तड़प गईं तुझे गले लगाने को ,
ये संसार गवाह है, कि हर इंसान से जाकर मैंने तेरा ज़िक्र किया है ,
ये बादल गवाह हैं, कि हर रोज़ मैंने तेरी याद में इनको मेरे साथ बरसने को कहा है ,
ये तारे गवाह हैं, कि टूटते तारे से मैंने सिर्फ तुझे माँगा है ,
ये दिल गवाह है, कि हर सांस में मैंने सिर्फ तुझको चाहा है ,
पर अब थक चुका है मन, थक गया हूँ तुझे खुद में ढूँढ़ते ढूँढ़ते और बस इतनी सी तमन्ना है ,
कि तमन्ना नहीं कि अब तुम्हें अपना बनाए !
कि तमन्ना नहीं कि अब तुम्हें अपना बनाए !
-इश्क़ और तमन्नाओं में जूझता ये दिल !



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